रिश्ते
यह तो हमारा भ्रम है
कि हम रिश्ते
बनाते और तोड़ते हैं
सच तो यह है
कि रिश्ते
हमें तोड़ते और बनाते हैं
गलत है यह सोच
कि रिश्ते हमें
हँसाते या रुलाते हैं
रिश्ते तो आईना हैं
बस हमें अपनी शक्ल
दिखलाते हैं
यह तो हमारा भ्रम है
कि हम रिश्ते निभाते हैं
सच तो यह है
कि आखरी दम तक
रिश्ते हमारा साथ
निभाते हैं
रिश्ते ही वह सीढ़ी हैं
जिस पर चढ़कर
हम भगवान के घर जाते हैं
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Thursday, April 16, 2009
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